Tuesday, August 8, 2017

डूबती सांझ.....


" डूबती सांझ का सूरज सदा दे
द‍िल में है क्‍या आज बता दे
नद‍ियों के संगम में भीगी है यादें
सामने आकर तू भी मुस्‍करा दे "

5 comments:

Dhruv Singh said...

आपकी रचना बहुत ही सराहनीय है ,शुभकामनायें ,आभार "एकलव्य"

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10-08-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2892 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Digamber Naswa said...

लाजवाब मुक्तक ...

Onkar said...

सुन्दर पंक्तियाँ

Pushpendra Dwivedi said...

ati sundar rachna